* इतिहास –

 

         चम्बा के राजाओं के बारे में विवरण हमें  कल्हण  द्वारा रचित “राजतिरंगिणी ” से मिलता है।  पत्थर लेख  , शिला लेख  तथा ताम्र पत्र में भी चम्बा का रिकॉर्ड मिलता है ।  चम्बा क्षेत्र में भद्र – साल्वयौधेय, ओदुम्बर  और किरातों  ने अपने प्राचीन गणतंत्रीय  कबीले स्थापित किये ।  इंडो -ग्रीक  और  शक कुषाणों  ने इन कबीलों को अपने नियंत्रण में कर उनकी शक्ति को क्षीण कर दिया ।  इन क्षेत्रों को बाद में अपठाकुराई  तथा राहुन  के नाम से जाना जाने लगा इनके शासक “ठाकुर ” व  “राजा” कहलाये ।  चम्बा  रियासत की स्थापना  550  में अयोध्या से आये सूर्यवंशी राजा  मेरु  ने की थी। मेरु ने भरमौर (ब्रह्मपुर) को अपनी राजधानी बनाया । 

 

 

 

* आदित्य वर्मन  –

 

                 आदित्य वर्मन का उल्लेख उसके परपोते मेरुवर्मन ( 680)  के  भरमौर  शिलालेख में मिलता है।  आदित्य वर्मन पहला  राजा था ।  जिसने अपने नाम के साथ वर्मन का उपनाम जोड़ा।  आदित्य वर्मन के बाद बाला  वर्मन ( 640 ) और  दिवाकर वर्मन  (660 ) चम्बा  के राजा बने ।

 

* मेरुवर्मन –

 

            मेरुवर्मन भरमौर का सबसे  शक्तिशाली राजा था।  मेरुवर्मन ने  चम्बा  तक अपने राज्य का विस्तार किया था।  मेरुवर्मन  ने भरमौर में विभिन मंदिरों का निर्माण करवाया था।  जैसे की भरमौर में मणिमहेश  मंदिर , लक्षणा देवी  मंदिर , नरसिंह मंदिर  और छतराड़ी  में शक्ति  देवी मंदिर  का निर्माण करवाया।  गुग्गा शिल्पी मेरुवर्मन का प्रसिद्ध  शिल्पी था।  मेरुवर्मन के पश्चात अजय वर्मन (760 ) गद्दियों   के  अनुसार  दिल्ली  से भरमौर आकर बसे थे।

 

* लक्ष्मी वर्मन –

 

                लक्ष्मी वर्मन (800) के समय राज्य में हैजा महामारी फैल गयी जिससे बहुत लोग मारे  गए ।

 

* मुसानवर्मन (820) –

 

                लक्ष्मी वर्मन की मृत्यु के बाद रानी ने राज्य से भाग कर एक   गुफा में पुत्र को जन्म दिया ।   गुफा में पुत्र को छोड़  रानी आगे बड़ गयी।  परन्तु वजीर और पुरोहित रानी की सचाई जानने के बाद गुफा में वापिस लोटे तो बहुत सारे चूहों को बच्चे की हिफाजत करते  पाया। इसी से राजा का नाम मुसानवर्मन रखा गया। मुसानवर्मन ने अपने शासन काल में  चूहों को मारने में प्रतिबंध लगा दिया था।

 

* साहिल वर्मन (920) –

 

               साहिल वर्मन ने चम्बा शहर की स्थापना की।  राजा साहिल वर्मन के दस  पुत्र एवं “एक पुत्री थी जिसका नाम चम्पावती था। चम्बा शहर का नाम उसने अपनी पुत्री  चम्पावती के नाम पर रखा।”  वह राजधानी को ब्रह्मपुर से चम्बा ले गया था।  राजा साहिल वर्मन की पहली रानी नैना देवी ने शहर में पानी की व्यवस्था के लिए अपने प्राणों  का बलिदान दे दिया था।  रानी नैना देवी की याद में चम्बा में प्रतिवर्ष सूही मेला मनाया जाता है।  साहिल वर्मन ने अपने कार्यकाल में तांबे की मुद्रा (चकली) चलवाई।  राजा साहिल वर्मन के गुरु योगी चटपटनाथ थे।  84 साधुओं के आशीर्वाद से राजा साहिल वर्मन को 10  पुत्र और  1 पुत्री  भरमौर में हुई।  युगांकरवर्मन साहिल वर्मन का सबसे बड़ा पुत्र था।

 

* युगांकरवर्मन(940) –

 

            युगांकरवर्मन की पत्नी त्रिभुवन  रेखा  देवी  ने भरमौर मंदिर का निर्माण करवाया।   युगांकरवर्मन ने चम्बा में गौरी शंकर के मन्दिर का निर्माण करवाया।

 

* सलवाहनवर्मन(1040) –

 

               राजतरंगिणी के अनुसार कश्मीर के शासक अनंतदेव ने भरमौर पर सलवाहनवर्मन के समय में आक्रमण किया था।  सलवाहन की मृत्यु अनंतदेव से लड़ते हुए हो  गयी थी। उसके बाद उसके पुत्र सोम वर्मन (1060) और अस्तुवर्मन  (1080)  राजा बने।

 

* उदयवर्मन(1120) –

 

        उदयवर्मन ने कश्मीर के राजा सुशाला  से अपनी दो पुत्रियों  देवलेखा और तारालेखा का विवाह किया ,जो सुशाला की (1128  में )मृत्यु के बाद सती हो गयी।

 

* ललित वर्मन(1143) –

 

           ललित वर्मन के कार्यकाल के दो पत्थर लेख देवी -री कोठी और सेचुनाला से प्राप्त हुए है।  जिससे पता चलता है की तिस्सा और पांगी क्षेत्र उसके कार्यकाल में चम्बा रियासत  के भाग थे। देवरी कोठी शिलालेख (1160) में राणानागपाल ने तथा  पांगी शिलालेख  (1170) सलाही के  पास  राणा लुद्रपाल ने अंकित करवाए थे।  इन दोनों शिलालेखों में ललित वर्मन को “महाराजाधिराज ” लिखा हुआ था।

 

* विजय वर्मन(1175) –

 

           विजय वर्मन ने मुहम्मद गौरी के  1191 और 1192  के आक्रमणों का फायदा उठाया कश्मीर और लद्दाख के बहुत  से क्षेत्रों पर कब्ज़ा कर  लिया था।

 

* गणेश वर्मन(1512) –

 

            गणेश वर्मन ने चम्बा राज परिवार में सर्वप्रथम “सिंह ” उपाधि का प्रयोग किया था।

 

* प्रताप सिंह वर्मन(1559) –

 

              गणेश वर्मन के पश्चात प्रताप सिंह वर्मन चम्बा का राजा बना।  वह अकबर का समकालीन  था।

 

* बलभद्र(1589) –

 

बलभद्र बहुत दयालु और दानवीर था।  लोग उसे “बाली – कर्ण” कहते थे।  उनका पुत्र जनार्दन ,उनको गद्दी से उठाकर स्वयं गद्दी पर बैठा।  जनार्दन के समय नुरपुर का राजा सूरजमल मुगलों से बचकर उसकी रियासत में छुपा था।

 

* पृथ्वी सिंह(1641) –

 

            जगत सिंह ने शाहजहाँ के विरुद्ध 1641  में विद्रोह कर दिया।  इस मौके का फायदा उठाते  हुए  पृथ्वी सिंह ,मण्डी और सुकेत की मदद से रोहतांग, दर्रे, पांगी, चुराह को पार कर चम्बा पहुंचे।

 

* चतर सिंह (1660 – 1690) –

 

         चतर सिंह ने बसौली पर आक्रमण कर वहाँ के राजा  संग्रामपाल से भलईप्राँगना जीत लिया।  चतर सिंह ने 1678 के सभी हिन्दू मंदिरों को नष्ट करने का आदेश मानने से इंकार कर दिया और उल्टे मंदिरों पर कलश चढ़ाए जो आज भी विद्यमान हैं।

 

* उदय सिंह(1690 -1720)

 

चतर सिंह के पुत्र राजा उदय सिंह ने अपने चाचा वजीर जय सिंह की मृत्यु के बाद एक नाई को  उसकी पुत्री के प्रेम में पड़कर चम्बा  का वजीर घोषित कर दिया।  उदय सिंह के बाद 1720 में जम्मू के राजा ध्रुवदेव की सहायता से उसका पुत्र उगर सिंह राजा बना। उगर सिंह के पश्चात उसका चचेरा भाई दलेल सिंह राजा बना। 

 

* उम्मेद सिंह –

 

       उम्मेद सिंह के शासन काल में चम्बा राज्य मण्डी की सीमा तक फैल गया।  उम्मेद सिंह का पुत्र राज सिंह राजनगर में पैदा हुआ।  उम्मेद सिंह ने राजनगर में  “नाडा महल ” बनवाया।  रंगमहल की नीव भी उम्मेद सिंह ने रखी थी।  “उसने अपनी मृत्यु के बाद रानी के सती न होने का आदेश  छोड़ रखा था”।  उम्मेद सिंह की 1764  में युद्ध कर दौरान ज्वालामुखी में मृत्यु हो गयी।

 

* राज सिंह(1764 – 94) –

 

        राज सिंह  अपने पिता की मृत्यु के बाद 9 वर्ष की आयु में राजा बना।  घमंड सिंह ने पठियार को चम्बा से छीन लिया।  परन्तु रानी ने जम्मू के रणजीत सिंह की मदद से इसे पुनः  हासिल कर लिया।  चम्बा के राजा राज सिंह और काँगड़ा के राजा संसार चंद के बीच रिहलू   क्षेत्र पर कब्जे के लिए   युद्ध हुआ। राजा राज सिंह की शहापुर के पास 1794 में युद्ध के दौरान मृत्यु हो गयी।  चम्बा के राजा राज सिंह और काँगड़ा के राजा संसार चंद ने 1788  में शाहपुर में संधि की थी।

 

* जीत सिंह (1808) –

 

          जीत सिंह के समय चम्बा राज्य ने नाथू वजीर को संसार चंद के खिलाफ युद्ध में सैनिकों के साथ भेजा।

 

* चढ़त सिंह (1808) –

 

         चढ़त सिंह 6 वर्ष की आयु में राजा बना।  नाथू वजीर राज काज देखता था। ” रानी शारदा ने 1825 में राधा कृष्ण मंदिर की स्थापना की”।  1838 में नाथू वजीर की मृत्यु के बाद “वजीर भागा” चम्बा का वजीर नियुक्त किया गया।

 

* श्री  सिंह (1884) –

 

            चढ़त सिंह की मृत्यु के बाद उसका सबसे बड़ा पुत्र श्री सिंह 5  वर्ष की आयु में गद्दी पर बैठा।  श्री सिंह की माँ कटोच राजकुमारी अपने मंत्री वजीर भागा की सहायता से राज्य का कार्यभार चलाती थी।

 

* गोपाल सिंह (1870) –

 

          गोपाल सिंह जो कि  श्री सिंह का भाई था।  वह गद्दी पर बैठा उसने शहर की सुंदरता बढ़ाने के लिए कई काम किये।  उसके कार्यकाल में 1871  में लार्डमायो चम्बा आये।  गोपाल सिंह को गद्दी से हटा 1873  में उसके बड़े बेटे शाम सिंह को राजा बनाया गया।

 

* शाम सिंह(1873) –

 

        शाम सिंह को सात वर्ष की आयु में अमृतसर के कमीशनर जनरल  रेनलटायलर ने चम्बा आकर 17अक्टूबर1873  को गद्दी पर बैठाया।  शाम सिंह के समय कर्नलब्लेयररीड (1874 – 1885)  आरटीवरनी  (1877 – 1878) और कैप्टेन सी एचटीमार्शल (1879 -1885) सुपरिन्टेन्डेन्ट थे।  1875  में कर्नलरीड के अस्पताल को तोड़ कर 1891 में  40विस्तर्य का शाम सिंह अस्पताल बनाया गया।  रावी नदी पर शीतल पुल जो 1894 की बाद में टूट गया।

 

* राजा भूरी सिंह  –

 

            12अक्टूबर 1904 को पंजाब के लेफ्टिनेंटगवर्नर पर आसीन चार्ल्सरिवाज़ ने भौरी सिंह को गद्दी पर बिठाया।  भूरी सिंह अपने भाई शाम सिंह के समय 7 वर्ष तक दीवान / वजीर रहे थे।  1905  में मिडिल स्कूल हाई स्कूल बना दिया।  चम्बा में पुस्तकालय खोला गया। ” राजा भूरी सिंह ने प्रथम विश्व युद्ध में (1914 – 18) में अंग्रेजों की सहायता की”।  राजा भूरी सिंह की 1919 में मृत्यु हो गयी।  जिसके बाद टिक्का राम सिंह (1919 – 35) चम्बा में राजा बने।

 

 * राजा राम सिंह (1919 – 1935) –

 

            राम सिंह को पंजाब के गवर्नर एडवर्ड मैक्लेगन ने मार्च 1920 में गद्दी पर बैठाया।  राजा राम सिंह को राजकाज का प्रशिक्षण देने हेतु  मिस्टर E.M. एटकिंसन को नियुक्त किया गया।  राजा ने चम्बा में 15 स्कूल खोले।  राजा राम सिंह ने अपने भाई मियां केसरी सिंह को अपना वजीर नियुक्त किया।  चम्बा – नुरपुर रोड , चम्बा – भरमौर सड़क कियानी के पास रावी नदी पर  अस्थाई  पुल का निर्माण , मल निकासी व्यवस्था पीने के  पानी  की आपूर्ति के लिए टैंक निर्माण जैसे कार्य राम सिंह के कार्यालय में हुए।

 

* राजा लक्ष्मण सिंह –

 

 

               राजा लक्ष्मण सिंह को 1935 में चम्बा का अंतिम राजा बनाया गया।  चम्बा रियासत 15 अप्रैल 1948 को हिमाचल प्रदेश का हिस्सा बन गया।

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