हिमाचल प्रदेश के भू-भौतिक प्रदेश :– 

हिमाचल  प्रदेश को निम्नलिखित भू-भौतिक क्षेत्रों में  बिभाजित  किया जा सकता है।

बाहरी हिमालय या  शिवालिक क्षेत्र :—शिवालिक का   शाब्दिक  अर्थ  है  शिव की  जटाएं है। प्राचीन भूगोल में इसे  मानक पर्वत भी कहा जाता है। इस क्षेत्र में सिरमौर जिले का नाहन तथा पांवटा  क्षेत्र  ,सोलन जिले  का  नालागढ़ क्षेत्र ,बिलासपुर  जिले के स्वारघाट  तहसील के क्षेत्र ,ऊना   काँगड़ा  तथा चम्बा  जिले के निम्नबर्ती  भू भाग सम्मिलित   है समुद्रतल से इसकी औसत   ऊंचाई 350 से 800  मीटर के मध्य है।

लम्बाकार-दून-घाटियां :–ये घाटियां दक्षिण में  शिवालिक पहाड़ियों तथा उत्तर में हिमालयन पर्वत की दक्षिणी ढालों के मध्य स्थित है। सिरमौर  जिले की कियारदा-दून,सोलन  जिले की   नालागढ़ दून,ऊना तथा काँगड़ा जिलों  की जसवां-नूरपुर दून  इसी प्रकार की लम्बाकार दून घाटियां है।

बाहरीहिमालयन श्रेणियाँ :—सियाल-हाथीधार चम्बा में ,चममुखि-सोला -सिंगी काँगड़ा तथा हमीरपुर में नैनादेवी की धार बिलासपुर में ,रामशहर तथा कसौली धार सोलन में तथा धारटी-सैन्धार सिरमौर जिले में  महत्ब्पूर्ण  बाहरी हिमालयन श्रेणियां  है ।

लघु हिमालय या  मध्यबर्ती क्षेत्र :-यह भू भाग बाहरी हिमालय था उच्च हिमालय क्षेत्र के  मध्य का संक्रमण क्षेत्र है। चम्बा ,काँगड़ा,मंडी  ,हमीरपुर,बिलासपुर,शिमला,सोलन,सिरमौर,जिलों के  अधिकतर भाग इसी  कटिबंध   में  स्थित  है। इस हिमालय  क्षेत्र की   सबसे बड़ी बिशेषता यह  है  की  धौलाधार एबं  पीर पंजाल पर्वत श्रृंखला  की और  बढ़ने    पर धीरे  धीरे  ऊंचाई बढ़ती जाती  है  । शिमला के दक्षिण में चूड-चांदनी की ऊँची चोटी स्थित है। इस भू क्षेत्र को प्रमुख  श्रेणियों तथा घाटियों मैं बिभाजित किया जाता है :

प्रमुख पर्वत श्रेणियाँ :-धौलाधार पर्वत श्रेणी सबसे प्रमुख श्रेणी है।धौलाधार का अर्थ है सफेद चोटी ।धौलाधार पर्वत श्रेणी की तलहटी पर काँगड़ा की घाटी या  धर्मशाला स्थित है।धौलाधार पर्वत श्रृंखला का उपरिसिरा  पीर  पंजाल श्रेणी के  दक्षिणी सिरे से जुड़ा हुआ है। धौलाधार पर्वत श्रेणी चम्बा तथा काँगड़ा जिलों के  मध्य सीमा बिभाजन  का   कार्य करती  है। ये  पर्वत  श्रेणियां   मंडी  तथा कुल्लू  जिले में सीमा  रेखा  बिभाजन का कार्य  करती है। शिमला  तथा सिरमौर  जिलों  में  चूड़धार  पर्वतमाला  सीमा बिभाजन का कार्य करती है।

उच्च  हिमालय या ग्रेट  हिमालयन क्षेत्र  :-इस  भू क्षेत्र का  बिस्तार चम्बा,कुल्लू,शिमला,किनौर,तथा  लाहौलस्पिति जिलों में है। इन  घाटियों की   समुद्र   तल से औसत  1500 से   2000 मीटर   के मध्य है।

ग्रेट हिमालयन तथा  पीरपंजाल   श्रेणियां :-ये प्रमुख पर्वतीय   श्रेणियां  रावी तथा  ब्यास  के  नदी  बेसिनों को   दक्षिणी हिस्सों में   ,जबकि  चिनाब तथा  स्पीति के  नदी बेसिनों को उत्तरी  भाग में एक  दूसरे  से  अलग करती है। पीरपंजाल  तथा  महान हिमालयन श्रेणियों को   कुंजुम  तथा  श्रीखंड  पर्वत   श्रेणियां कुल्लू  घाटी  के उत्तर  तथा पूर्व से आकर  मिलती  है  । पाराशाला  ,दियो टिब्बा  तथा डिब्बी बोकरी   यहां  की सबसे  ऊँची  पर्वतीय  चोटियां   हैं । यह  ऊँची-ऊँची  पर्वत श्रेणियां  इस  क्षेत्र की जलबायु संबधी  परिस्थितियों  को निर्धारित करने  में  महत्बपूर्ण  भूमिका निभाती है।

आंतरिक  हिमालय  या ट्रांस हिमालयन क्षेत्र :-यह   हिमाचल   प्रदेश के उत्तरी  तथा उत्तरी   पूर्वी हिस्से  में स्थित है। जस्कर श्रेणी तथा इसकी उपशाखाएं हिमाचल प्रदेश  की तिब्बत के साथ   अंतर्राष्ट्रीय सीमाएं   निर्धारित करती  हैं । जस्कर  हिमालय  पर्वत  श्रेणी  या  ट्रांस  हिमालय किनौर और स्पीति  को तिब्बत  से अलग   करती है। भौगोलिक स्तर पर इस क्षेत्र का बिस्तार चम्बा  की पांगी तहसील,लाहौलस्पित्ति जिले तथा किनौर जिले  में  है   । इस  भू भाग के  दक्षिणी  हिस्से  पर  पीरपंजाल तथा  ग्रेट  हिमालय  श्रेणियों   की प्रधानता  है । जिसके  कारण  यहां  पर बर्षा ऋतू के दौरान भी शुष्क परिस्थितियां पायी जाती  हैं । ग्रेट हिमालय  पर्वतों  के आंतरिक  भाग  को ही ट्रांस हिमालय  कहते  है  ।

इस  भूभाग की  अन्य महत्बपूर्ण स्थलाकृतियां ,जास्कर श्रेणी है  ,जो इस  भू भाग के पूर्वी हिस्से में स्थित है। यह   पर्वत श्रेणी किनौर और स्पीति को अंतराष्ट्रीय स्तर पर    तिब्बत    से अलग  करती है। इस श्रेणी  में कई ऊँची ऊँची  चोटियां  हैं  इनमे  शिल्ला  7026 मीटर  ,हिमाचल की  सबसे  ऊँची    चोटी है  एबं  रीबो फ़ग्यूरल ,शिपकी,सबसे ऊँची चोटियां हैं। 

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