इतिहास  :- 

हमीरपुर जिले  की स्थापना राजा  हमीरचंद ने की थी । राजा  आलमचंद  जो  की  काँगड़ा के शासक  थे,1700. में उनकी  मृत्यु के बाद राजा हमीरचंद 1700-1747 . तक काँगड़ा के शासक बने।  उस समय काँगड़ा किला मुगलों के अधीन था । हमीरचंद ने 1743. में  जिस स्थान  पर  एक  किले  का  निर्माण किया ,बही स्थान  कालांतर में हमीरपुर कहलाया ।  1884 . में  हमीरपुर किले को तहसील कार्यालय बनाया गया। इस प्रकार हमीरपुर को नादौन  के  स्थान  पर    1868. में तहसील  मुख्यालय बनाया गया।

1966  . में जिला  हमीरपुर  पूर्बी  पंजाब का  हिस्सा था। 1966 . में हमीरपुर को काँगड़ा जिले की तहसील के  रूप हिमाचल  प्रदेश  में मिलाया गया। 1 सितम्बर 1972.  को  हमीरपुर को  काँगड़ा से अलग करके जिला बनाया गया। 1980  .  में सुजानपुर ,तिहरा ,नादौन और  भोरंज तहसील का गठन किया गया। हमीरपुर , जिला बनने  से पूर्व  काँगड़ा जिले  का उपमंडल   था। हमीरपुर  जिले  का गठन  हमीरपुर  और बड़सर दो  तहसीलों को मिलाकर किया गया था।

 सुजानपुर टिहरा  :–सुजानपुर शहर की स्थापना  घमंड चंद ने    की थी । घमंड चंद  ने ही सुजानपुर में   1761. में चामुंडा मंदिर का निर्माण किया था। काँगड़ा के राजा अभयचन्द ने  सुजानपुर की पहाड़ियों पर दुर्ग और महल बंनबाये जो टिहरा के नाम से प्रसिद्ध है। काँगड़ा के राजा संसारचंद  ने  सुजानपुर   टिहरा को अपने   राजधांनी बनाया था । और सुजानपुर में राजा संसारचंद  ने  1793  ई  में गौरी शंकर  मंदिर का  निर्माण करबाया। सुजानपुर का नर्वदेश्वर मंदिर भी संसारचंद  के द्वारा बनबाया गया था। सुजानपुर टिहरा  में ब्रज जैसी होली की शुरुआत भी संसार चंद राजा ने ही की थी ।1820में  बिल्लियम मूरक्राफ्ट और जॉर्ज ट्रिबेक  ने सुजानपुर की यात्रा  की।। हिमाचल प्रदेश का एकमात्र सैनिक स्कूल भी सुजानपुर टिहरा में ही है  । और   हिमाचल प्रदेश का सबसे बड़ा खेल मैदान भी सुजानपुर टिहरा मैं ही स्थित है  ।

 

नादौन:- नादौन ,ब्यास नदी के  किनारे बसा  हुआ एक शहर  है ।इसी  स्थान पर बिलासपुर   के  राजा  भीमचंद  और  गुरु  गोबिंद  सिंह  ने 1687. में  मुगलों को  हराया  था  ,जिसको की नादौन-युद्ध    भी  कहा    जाता  है । नादौन के  निकट  बसे अंमतर  को काँगड़ा के  राजा संसार चंद ने अपनी ग्रीष्मकालीन राजधानी  बनाया।  

राजा संसारचंद   ने मंडी के राजा ईश्बरी   सेन  को 12  बर्षो  तक नादौन जेल  में कैद करके  रखा ,जिसको बाद में  गोरखाओं ने  छुड़वाया था। संसार चंद राजा ने नादौन  के बारे  में  कहा था  “आएगा   नादौन  ,जायेगा  कौन।

1820   में मूरक्राफ्ट ने  नादौन   शहर  की  यात्रा    की । 1820  ई.  में   नादौन  को तहसील  मुख्यालय बनाया गया । 2000 .  में  नादौन    में  ही “यशपाल साहित्य अकेडमी  की  स्थापना की गयी।

महलमोरियो :– 1806 . में हमीरपुर के महलमोरियो में गोरखों ने    संसारचंद  को हराया  था  ,जिसके कारण   राजा  संसार चंद  को  काँगड़ा किले  में  शरण  लेनी  पड़ी थी। हमीरपुर 1806-1846 .में सिक्खों के नियंत्रण में था। 1846. में  हमीरपुर शहर अंग्रेजों के अधीन आ गया।

भूम्पल:-  साहित्यकार  यशपाल का जन्म  भूम्पल में हुआ। 1918 . में यशपाल  ने  स्वाधीनता संग्राम में  अपनी महत्ब्पूर्ण भागीदारी निभाई थी।

 

विक्टोरिया क्रॉस  :—हमीरपुर  के लान्स नायक लाला   राम  को प्रथम बिश्बयुद्ध  में असहनीय साहस के लिए विक्टोरिया क्रॉस प्रदान  किया गया।   नायक लाला   राम पहले    हिमाचली  थे जिनसे  विक्टोरिया क्रॉस से नवाजा  गया  था। 

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