मध्यकालीन आक्रमणकारी  महमूद गजनवी –

                                 गजनवी ने भारत पर 17  आक्रमण किये 1009 में आनंदपाल को हराने के बाद नगरकोट पर आक्रमण किया।  और उसके खजाने को लूट लिया ब्रजेश्वरी मंदिर (काँगड़ा)।  दिल्ली के तोमर राजा महिपाल ने नगरकोट से गजनवी शासन की समाप्ति  की।  1023 तक गजनवी का शासन था।

मुहम्मद गौरी ने पहाड़ी  पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया।  सल्तनत में तैमूर लांग ने भारत पर आक्रमण किया। 

 

* सल्तनत काल (1206 – 1526) 

    सल्तनत काल में  1206 – 1290 और खिलजी वंश (1290 – 1320 ) ने पहाड़ी राज्यों पर ख़ास ध्यान नहीं दिया। 

 तुगलक वंश :

मुहम्मद बिन तुगलक : 1337  में मुहमद विन तुगलक ने नगरकोट के राजा पृथ्वीचंद को पराजित किया।

 

फिरोजशाह  तुगलक

(1351 – 1388) 1360 में काँगड़ा के राजा रूपचंद ने सेना लेकर दिल्ली को लूटा।  इससे क्रोधित होकर फिरोजशाह तुगलक ने काँगड़ा के रूपचंद को सबक सीखने के लिए 1361 में नगरकोट पर आक्रमण किया।  काँगड़ा पर आक्रमण का जिक्र “तारीख -ऐ -फिरोजशाही”  में मिलता है।  राजा रूपचंद ने तुगलक की अधीनताr स्वीकार कर ली। 

 

* तैमूर लंग का आक्रमण :

1398 में मंगोलो का आक्रमण तैमूर के नेतृत्व में हुआ।  उस समय काँगड़ा में राजा मेघचन्द था।  तैमूर लंग ने वापसी में 1399 में शिवालिक क्षेत्रों पर आक्रमण किय।  उस समय हिन्दुर नालागढ़ का शासक था

 

* मुग़ल काल (1526 -1857)

बाबर – बाबर ने 1525 में काँगड़ा के निकट मलोट में चौंकी स्थापित की पानीपत का प्रथम युद्ध बाबर तथा इब्राहिम लोदी के बीच हुआ  तथा बाबर विजय रहा। 

 

अकबर – 

1556 में सिकंदर शाह को पकड़ने के लिए नूरपुर में सेना भेजी क्यूंकि नूरपुर का राजा भक्तमल की सिकंदर शाह के साथ दोस्ती थी।  अकबर पहाड़ी राजाओं को अपनी अधीनता स्वीकार करने के लिए बच्चों या रिश्तेदारों को बंधक के रूप में राज दरबार में रखता था।  अकबर ने राजा जय चंद को बंधक बनाया।  1572  में टोडरमल की पहाड़ी रियासतों की शाही जमींदारी स्थापित करने के लिए नियुक्त किया।

 

जहांगीर – 

1605 में गद्दी पर बैठ काँगड़ा के राजा विधिचंद ने 1605 में मृत्यु हो गयी।  उसके बाद त्रिलोचन गद्दी पर बैठा।  काँगड़ा का किला 1620  में मुगलों के अधीन आ गया।  काँगड़ा किले पर नवाब अली खान के नेतृत्व में मुगलों का कब्जा हुआ।  जहांगीर 1622  में धमेरी आया।  उसने अपनी पत्नी नूरजहां के नाम पर धमेरी का नाम किलेदार नवाब अलीखान था। 

 

शाहजहां- 

शाहजहां के शासनकाल में नवाब असवदुल्ला खान और और कोच कुलीखान काँगड़ा किले के मुगल किलेदार बना।  उसे बाण गंगा नदी के पास दफनाया।  सिरमौर का राजा मन्धाता प्रकाश शाहजहां का समकालीन था। 

 

गत सिंह – 

1627 में शाहजहां ने जगत सिंह मनसव पुणे  पक्का कर दिया।  जगत सिंह को 1634 में वगस का फौजदार नियुक्त किया। जगत  सिंह  ने शाहजहां से 1642 में सीध की। 

औरंगजेब और पहाड़ी राज्य :

 

चम्बा  (चत्तर सिंह) – औरंगजेब ने चम्बा के मंदिरों को गिराने की आज्ञा दी तथा चत्तर सिंह ने इसके उत्तर में सभी मंदिरों को बुर्जी बनाकर उनके सजाने की आज्ञा दी। 

 

बुशहर (केहरि सिंह)– औरेंजेब ने इसे छत्रपति का ख़िताब प्रदान किया।

सिरमौर – सिरमौर रियासत पर मुगलों की सम्प्रभुता थी।  इसके शासनों को मुगलों से मैत्रीपूर्ण संबंध थे। 

उत्तर मुगलकाल में पहाड़ी राज्य –

नादिरशाह -1707  में औरेंगजेब की मृत्यु के बाद मुगलों का पतन हुआ।  नादिरशाह ने 1739  में भारत पर आक्रमण किया। 

अदीना वेग -यह पंजाब का गवर्नर बना।  मंडी रियासत ने उसकी अधीनता स्वीकार की।

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