झीले :-

बनाबटी(कृत्रिम झीले ):-

गोबिंद सागर झील :-

हिमाचल प्रदेश की सबसे बड़ी कृत्रिम झील गोबिंद  सागर  है। यह झील बिलासपुर जिले में सतलुज  नदी पर नई है

इसकी लम्बाई 88  किलोमीटर है

इस  पर 226 मीटर ऊँचा भाखड़ा बांध बना है

 

 पौंग झील :–यह झील काँगड़ा जिले में स्थित है ओर ब्यास नदी पर स्थित है। इसकी लबाई 42  किलोमीटर है

पौंग बांध भी इसी झील के पास  स्थित है। 2002 में इसे रामसर साइट घोषित कर दिया गया 

 

पंडोह झील:–यह झील मंडी जिले में  ब्यास नदी पर  बनी  हुई है। इसकी  लम्बाई   14 किलोमीटर है । यह   झील  राष्ट्रीय  मार्ग-21  के  किनारे  स्थित  है । सतलुज  ब्यास  लिंक द्वारा     सुन्दरनगर   की बल्ह घाटी  को सिंचाई सुबिधा  दी जाती है।  

 

चमेरा  झील:–

चम्बा   जिले  में  चम्बा- पठानकोट  मार्ग  पर  रावी नदी स्थित है  । चम्बा   जिले में  स्थित  रावी  नदी पर चमेरा बाँध   बना है

 

हिमाचल  प्रदेश की प्राकृतिक झीले :-

चम्बा जिला :–

 

मणिमहेश झील :- मणिमहेश झील (4200 मीटर )भरमौर उपमंडल में स्थित है। यहां गोरी कुंड और शिवकुण्ड है। यहां से —किलोमीटर दूर धनशो ह। जहां भगवान्  शिव ने भस्मासुर से बचने के  लिए शरण ली थी।

गदासुर झील :- (ऊंचाई 3505 मीटर)चुराह तहसील में स्थित है।

 

खजियार झील :- ऊंचाई 1951 मीटर है। खजियार झील को हिमाचल प्रदेश का मिनी स्विट्ज़रलैंड भी कहा जाता है। इसे ये नाम पी- ब्लेज़र  ने-  7 जुलाई  1992 को दिया । यहां  खज्जी नाग का मंदिर स्थित है।

 

लामा झील:- ये भरमौर उपमंडल में स्थित झील ,जो की साथ झीलों का समूह है। इसकी ऊंचाई 3962  मीटर है।

महाकाली झील :- चुराह तहसील में स्थित ये झील देवी काली को समर्पित है। जिसकी ऊंचाई 3657  मीटर है

काँगड़ा जिला

 

डल झील:-

धर्मशाला से 11 किलोमीटर स्थित ,इस  झील की ऊंचाई 1775 मीटर है । यहां भागसूनाथ का मंदिर स्थित है

 

करेरी झील:- इसकी ऊंचाई-3048-मीटर है।

 

मछियाल झील :–

 

यह झील नगरोटा बंगवा के जोगल खड्ड में स्थित है। इस झील में मछिन्द्र महादेव एवं संतोषी माँ का मंदिर स्थित है।

 

मंडी जिला :-

 

कुमारबाह झील :- इस झील की ऊंचाई 3150 मीटर है।

 

पराशर  झील :- इस झील की ऊंचाई 2743 मीटर है। इसमें चंद्राकार गोलाकार टापू तैरता दिखाई देता है। यहां पर पगौड़ा शैली का ऋषि पराशर का मंदिर है ,जिसे राजा बानसेन ने बनबाया था। ऋषि पराशर बेद्ब्यास के पिता थे।

 

रिवालसर झील :- इस झील को बौद्ध लोग पदमचंन भी कहते है। बौद्ध भिक्षु पद्मसम्भव के जन्म दिन पर यहां छेशु मेला लगता है । यह झील हिन्दू,सिख,और बौद्ध तीनो धर्म  के लोगों का तीर्थ स्थल है। इसे तैरते हुए टापुओं की झील भी कहा जाता है। यह लोमश ऋषि की तपोस्थली रही है।

 

कामरूनाग :- यह झील चिच्योत तहसील में स्थित,जिसकी ऊंचाई 3150 मीटर है। इस झील के पूर्व में ऊंचाई पर शिकारी देवी का मंदिर स्थित है।

 

कुंतभयोग झील :- यह झील रिवालसर  से 4 किल्लो मीटर की दुरी पर प्रमुख नैना देवीधार पर स्थित है। इस झील की ऊंचाई 1700 मीटर है। इस झील का सीधा सबंध पांडवो की माता कुंती से है।

 

कालासर  झील :–यह झील रिवालसर जिले के किनारे   बसे शहर पर 1755 मीटर  ऊंचाई पर स्थित है।

 

कुल्लू जिला :-

 

मंतलायी झील :-ये झील 1116 मीटर ऊंचाई पर स्थित है ,इस झील से पार्वती नदी निकलती है।

 

द्योरि झील :- सैंज घाटी

 

हंसा झील :- सैंज घाटी

 

भृगु झील :- यह भृगु ऋषि की तपोस्थली थी

 

श्रृंग तयुंग झील :- यह श्रृंग ऋषि की तपोस्थली थी।

 

दशहर झील :-यह झील मनाली से 25 किलोमीटर दूर 4200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।

 

नयनसर झील:-बहरी सिराज में भीमद्वार और श्रीखंड महादेव के मध्य 4000मीटर ऊंचाई पर यह झील स्थित है। यहां भीम ने गुफा तैयार की थी

 

सरयोलसर झील :-यह झील जालोरी दर्रे के दक्षिण-पूर्व में स्थित है ,इसकी ऊंचाई 3100 मीटर है। इस झील की देवी बूढी नागिन है ,जिसका मंदिर घियागि में है

 

ढैह्णासर झील:15000 फुट की ऊंचाई पर स्थित इस झील के पास भगवान् शिव ने त्रिशूल से डायन का संहार किया था।

 

लाहौलस्पिति झील :-

 

चंद्रताल झील :- ह्यूनत्सांग ने इसे लोहित्यासरोबर का नाम दिया था। यह झील 4270 मीटर ऊंचाई पर स्पीति  में स्थित है। यह झील रामसर साइट   है।

 

सूरजताल झील :- यह झील बारालाचा दर्रे के समीप स्थित है। इस झील से भागा नदी का उद्गम होता है ,इस झील की ऊंचाई 4883 मीटर है।

 

दीपकताल झील :-दारचा और बारालाचा झील के मध्य स्थित इस झील की ऊंचाई 3200 मीटर है।

 

युनामस्सा झील :-लाहौल में स्थित ये झील 4680 मीटर की ऊंचाई में स्थित है।।

 

नीलकंठ झील :-लाहौल के नैनगाहर घाटी  में स्थित इस  झील में केवल पुरषो को दर्शन करने की आज्ञा है। यह झील नील रंग की है।

 

धनकर झील :-यह झील स्पीति में स्थित है।

 

सिस्सू झील

 

जिला शिमला :-

 

चन्द्रनाहंन झील :-यह झील 7 सरोबरों का समूह  है। इसकी ऊंचाई-4267 मीटर है। यह रोहड़ू शिमला में स्थित है। यह झील पब्बर नदी का उद्गम स्थल है।

ताणु जुबल झील

गढ़ गुफ्फर

कराली झील

बराडोन्सर झील

किनौर झील :-

 

नाको झील :-इसकी ऊंचाई 3662 मीटर है।

सौरंग झील

सिरमौर झील :–

 

रेणुका झील:-ये हिमाचल प्रदेश की सबसे बड़ी प्राकृतिक झील है। जो 2.5  किलोमीटर है। इसकी आकृति सोई हुई स्त्री जैसी है। रेणुका भगवान् परशुराम की माता है। परशुराम ने अपने पिता जमदग्नि की आज्ञा का पालन करते हुए ,अपनी माता की बलि दे दी थी। जमदग्नि जामलु देवता के रूप में जाने जाते है। यह झील रामसर आद्रभूमि साइट है।

 

सुकेती झील :-यह झील मारकंडा नदी के बाएं किनारे स्थित है।

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