मंडी (Mandi)

जिले के रूप में गठन 15 अप्रैल, 1948 ई०., और जिला मुख्यालय मंडी है | मंडी का कुल क्षेत्रफल 3950 वर्ग किलोमीटर है | मंडी हिमाचल प्रदेश के मध्य भाग में स्थित जिला है| मंडी जिले के पूर्व में कुल्लू, पश्चिम में बिलासपुर और हमीरपुर, उत्तर में काँगड़ा और दक्षिण में सोलन और शिमला जिले की सीमाएं लगती है

*इतिहास

मंडी जिला सुकेत और मंडी रियासतों से मिलकर बना है सुकेत रियासत की स्थापना पहले हुई है | सुकेत रियासत की स्थापना 765 ई०” में वीरसेन ने की |

मंडी रियासत 

1.    मंडी रियासत की स्थापना – मंडी रियासत की स्थापना सुकेत रियासत के राजा साहूसेन के छोटे भाई बाहुसेन ने 1000 ई० में की | बाहुसेन और साहुसेन के बीच    अच्छे संबन्ध नहीं थे जिस कारण बाहुसेन ने सुकेत रियासत छोड़कर मंगलोर (कुल्लू) में मंडी रियासत की नींव रखी| बाहुसेन ने हाट (कुल्लू) में राजधानी  स्थापित की

*.    बाणसेन – बाहुसेन की 11 वीं  पीढ़ी के राजा करंचन सेन 1278 ई० के आसपास मंगलोर युद्ध में कुल्लू के राजा द्वारा मारे गए | करंचन सेन की गर्भवती पत्नी ने अपने पिता के अधिकार क्षेत्र वाले सिओकात मंडी (ओक)  में बाण के वृक्ष के निचे एक पुत्र को जन्म दिया जिसका नाम बाणसेन रखा गया | क्यूंकि वह बानवृक्ष के निचे पैदा हुआ था | बाणसेन के नाना की कोई संतान नहीं थी, इसलिए बाणसेन सीओकोट का मुखिया बना | बाणसेन ने 13 वीं –14 वीं सदी में मंडी के भियुली में अपनी राजधानी बनाई | “बाणसेन ने पराशर झील के पास पराशर मंदिर का निर्माण करवाया” | मंडी में मंडी रियासत की स्थापना का श्रेय बाणसेन को जाता है जिसने अपनी राजधानी को मंगलोर से भियुली में स्थानांतरित किया | बाणसेन ने 1278 ई० से 1340 ई० के मध्य शासन किया

*.    अजबर सेन – बाहुसेन की 19 वीं  पीढ़ी के अजबर सेन 1527 ई० में मंडी के राजा बने | “अजबर सेन ने 1527 ई० में मंडी शहर की स्थापना” कर उसे अपनी राजधानी बनाया | अजबर सेन ने मंडी शहर में भूतनाथ मंदिर का निर्माण करवाया | अजबर सेन की रानी सुल्ताना देवी ने मंडी का त्रिलोकीनाथ मंदिर बनवाया | अजबर सेन की मृत्यु 1534 ई० में हुई

*.    साहिब सेन (1554 -75 ई०– “साहिब सेन अकबर का समकालीन “मंडी का राजा था जिसने गुम्मा द्रंग की नमक खानों को अपने नियंत्रण मे ले लिया

*.    सुरजसेन – सुरजसेन से पूर्व केशवसेन के समय मंडी मुगलों के नियंत्रण में आ गया था | सुरजसेन ने 1625 ई० में कमलाहगढ़  किला बनवाया सुरजसेन ने मंडी में दमदमा महल का निर्माण करवाया | कुल्लू के राजा मानसिंह ने सुरजसेन को पराजित किया था सुरजसेन ने 18 पुत्रों की मृत्यु के बाद मघोराय की चांदी की प्रतिमा की 16  मार्च, 1648 ई० में स्थापना करवाई | मंडी शिवरात्री मेले में रथयात्रा  का आरम्भ इसी तिथि से  माना जाता है क्यूंकि इस दिन सर्वप्रथम मंडी शिवरात्री में मघोराय के रथ की शोभयात्रा  निकाली  गई थी

*.    श्याम सेन (1658 ई० )सुरजसेन के भाई श्याम सेन ने 1658 ई० में मंडी की गद्दी संभाली थी | श्याम सेन ने मंडी में श्यामा काली मंदिर का निर्माण करवाया

*.    सिद्धसेन – (1678-1727 ई०) – मंडी के राजाओं में सिद्धसेन एक योग्य एवं कुशल योद्धा माना जाता है | उसने मिया जिप्पू को वजीर नियुक्त किया जो एक कुशल प्रशासक और चतुर राजनीतिज्ञ था ।  सिद्धसेन के शासनकाल में  गुरुबोबिन्द सिंह मंडी आये थे | 

*.    ईशवरी सेन (1779-1826) – ईशवरी सेन को संसारचंद ने 12 वर्षों तक नादौन में कैद रखा था । जिन्हे 1805 ई० में गोरखों ने आज़ाद करवाया | मंडी रियासत 1809 ई० में सिक्खों के अधीन आ गई

*.    बलवीर सेन (1839 ई०बलवीर सेन (ईशवरी सेन के पुत्र ) 1839 ई० में मंडी का राजा बना | महाराजा रणजीत सिंह के पोते नौनिहाल सिंह ने 1840 ई० में जनरल वन्चूरा (फ़्रांसिसी) के नेतृत्व में मंडी रियासत पर आक्रमण कर मंडी शहर और कमलाहगढ दुर्ग पर कब्जा कर लिया 1840 ई० में बलवीर सेन को कैद कर अमृतसर के गोबिंदगढ़ किले में रखा गया | मंडी रियासत 9 मार्च,1846 ई० को ब्रिटिश सरकार के नियंत्रण में आ गयी | बलवीर सेन की मृत्यु 1851 ई० में हुई |  

*.                      बिजे सेन (1851-1902ई०) – बजीर गसौन, मियां भाग सिंह के देखरेख में बिजे सेन मंडी के राजा बने | मि. क्लार्क को बिजे सेन की शिक्षा का कार्यभार सौंपा गया | लार्ड मायो 1871 ई० में मंडी आए | बिजे सेन ने 1872 ई० में पालमपुर दरबार में भाग लिया | सर हेनरी डेविस ने 1874 ई० में मंडी की यात्रा की |बिजे सेन की 1902 ई० में मृत्यु हो गई | लार्ड एल्गिन ने 1899 ई० में मंडी की यात्रा की | लाला लाजपत राय 1906 ई० में मंडी आए |  

*.                       भवानी सेन भवानी सेन ने 1906 ई० में दरबार हॉल बनवाया | राजा भवानी सेन ने 1911 ई०  में दिल्ली दरबार  में भाग लिया | मंडी से पंजाब सरकार का नियंत्रण 1 नवंबर,1921  ई० को हटाकर ब्रिटिश – भारत सरकार के अधीन ला दिया गया

*.                      राजेंद्र सेन ( 1948  ई०) – जोगेन्द्रसेन (1925-1948 ई०) मंडी रियासत का अंतिम राजा था

सुकेत रियासत की स्थापना 

 सुकेत रियासत की स्थापना 765  ई० बीर सेन ने की थी

*.    वीरसेन वीरसेन ने सर्वप्रथम कुननु धार को अपना आवास बनाया | वीरसेन ने सुकेत रियासत की पहली राजधानी रूढ़ि इलाके  पांगणा में स्थापित की | वीरसेन  मुसंवरमन ने मुसानवर्मन को अपने राज्य की राजधानी पांगणा में आश्रय देकर अपनी पुत्री का विवाह उससे करवाया | वीरसेन ने  जांगीर को दहेज  मुसानवर्मन को दिया | वीरसेन ने कुल्लू के राजा भूपपाल  को  कैद कर कुल्लू को अपनी जागीर बनाया | वीरसेन ने काँगड़ा के साथ सीमा रेखा कर निर्धारित कर सीरखड्ड पर दुर्ग का निर्माण करवाया | हाटली के राणा को हराने के उपलक्ष्य में वीरसेन ने बिरकोट दुर्ग का निर्माण करवाया

*.  विक्रमसेन विक्रमसेन धार्मिक स्वाभाव का राजा था | वह 2 वर्षों के लिए अपना राजपाठ अपने भाई त्रिविक्रमसेन को सौंपकर हरिद्वार तीर्थ यात्रा पर चला गया | त्रिविक्रमसेन ने कुल्लू के राजा हस्तपाल के साथ  मिलकर विक्रमसेन के खिलाफ षड्यंत्र रचा

*.    लक्ष्मण सेन – लक्ष्मण सेन ने कुल्लू पर आकर्मण कर बजीरी रूपी, बजीरी लगसारी और बजीरी परोल के कुछ हिस्सों पर कब्जा कर लिया

*.    साहुसेन (1000 ई०) – साहुसेन के भाई बाहुसेन ने मंगलोर (कुल्लू) में मंडी रियासत की स्थापना की

*.    मदन सेन (1240 ई०) – मदनसेन ने पांगणा के उत्तर में मदनकोट दुर्ग का निर्माण करवाया | मदनसेन ने गुम्मा और द्रंग के राजाओं को हराकर नमक की खानों पर कब्जा कर लिया | मदनसेन ने कुल्लू पर पुनः कब्जा कर मनाली से बजौरा तक का इलाका राणा भोसल को दे दिया | मदनसेन ने बटवाड़ा के राणा मांगल को हराया जिससे राणा मांगल को सतलुज पार भाग कर मांगल रियासत की स्थापना करनी पडी | मदनसेन के शासन मे सुकेत रियासत अपनी समृद्ध के चरम पर पहुँच गया था | मदनसेन ने 1240 ई० में पांगणा से राजधानी बदलकर लोहरा (बल्हघाटी)में स्थापित की

*.    करतार सेन (1520  ई० ) – करतार सेन ने 1520 ई० में अपनी राजधानी लोहरा से करतारपुर स्थानांतरित की | करतारपुर को वर्तमान में पुरानानगर कहा जाता है | करतारसेन के बाद अर्जुन सेन राजा बना जो कुल्लू के राजा जगत सिंह का समकालीन था

*.    श्यामसेन (1620 ई०) – श्यामसेन  को नूरपुर के राजा जगतसिंह की शिकायत पर मुग़ल सम्राट औरंगजेब ने दिल्ली बुला कर कैद कर दिया | श्यामसेन ने महुनाग से उसकी मुक्ति की प्रार्थना की जिसके बाद जगत सिंह के विद्रोह  के कारण श्यामसेन की जेल से शीघ्र मुक्ति हो गई | श्यामसेन ने 400 रुपए वार्षिक कर पर महुनाग मंदिर को जागीर दान में दे दी | श्यामसेन के बाद रामसेन ने मोधपुर में रामगढ़ दुर्ग बनवाया

*.    गरुणसेन (1721 -1748 ई०) – “गरुणसेन ने सुंदरनगर (बनेड प्राचीन नाम ) शहर की स्थापना की जिसे विक्रमसेनन ने राजधानी बनाया | गरुणसेन की रानी ने सूरजकुंड मंदिर का निर्माण करवाया

*.    विक्रमसेन (1748 -1767  ई०) – विक्रमसेन के समय 1752  ई०  में अहमद शाह दुर्रानी ने सुकेत रियासत पर कब्जा किया | 1758  ई०  में अदीना बेग ने सुकेत रियासत पर कब्जा किया | सुकेत रियासत पर विक्रमसेन के समय में सर्वप्रथम सिक्ख शासन 1758  ई०  में जस्सा सिंह रामगढ़िया ने स्थापित किया

*.                      रणजीत सिंह (1767-1791 ई०) – रणजीत सेन के समय जय सिंह कन्हैया (1775 -1786  ई०) ने सुकेत रियासत को अपने अधीन रखा

*.                      विक्रम सेन द्वितीय (1791-1839  ई०) – विक्रम सेन के बजीर नरपत के साथ संबंध अच्छे नहीं थे | इसीलिए विक्रमसेन 1786  ई० से 1792 ई० तक महलमोरियो में रहे | अपने पिता की मृत्यु के बाद विक्रमसेन ने सर्वप्रथम नरपत बजीर को बंटवारा किलेमें कैद कर मरवा दिया | विक्रमसेन ने बनेड (सुंदरनगर) को अपनी राजधानी बनाया | सुकेत रियासत 1809  ई०  में विक्रमसेन के समय में महाराजा रणजित सिंह के अधीन आ गई | विलियम मूरक्राफ्ट ने 1820 ई०  में सुकेत रियासत की यात्रा की |     

*.                      उग्रसेन (1838-76  ई०) – उग्रसेन के समय 1839  ई०  में विग्ने ने सुकेत की यात्रा की | रणजीत सिंह के पोते नौनिहाल सिंह ने 1840 0 में जनरल वंचुरा के नेतृत्व में रियासत पर कब्जा कर लिया | उग्रसेन ने 1846  ई०  में सिक्खों को राज्य से निकालकर ब्रिटिशसत्ता   की अधीनता स्वीकार कर ली 1846  ई०  में सुकेत रियासत अंग्रेजों के अधीन आ गया

*.                      दुष्ट निकंदन सेन (1879-1908 ई०) – दुष्टनिकन्दन सेन के समय 1893  ई०  में भोजपुर में स्कूल, बनेड में पोस्ट ऑफिस 1900  ई०  में और टेलीग्राफ 1906  ई०  में खोला गया | सतलुज नदी के ऊपर 1889  ई०  में ज्यूरी में पुल का निर्माण किया गया

*.                      भीम सेन (1908-1919  ई०) – भीमसेन ने बनेड के किंग एडवर्ड अस्पताल खोला | उन्होंने मंडी सुकेत मोटर सड़क का निर्माण करवाया

*.                      लक्ष्मण सेन (1919 -1948  ई०) – लक्षमण सेन सुकेत का अंतिम राजा था | प्रथम नवंबर, 1921  ई०  को सुकेत रियासत ब्रिटिश भारत सरकार के अधीन आ गई | फरवरी 1948  ई०  में पंडित पदमदेव के नेतृत्व में सुकेत सत्याग्रह हुआ | जिसके बाद सुकेत रियासत का विलय भारत में हो गया | मंडी और सुकेत रियासत को मिलाकर 15 अप्रैल, 1948  ई०  को मंडी जिले का निर्माण किया गया |     

 

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