हिमाचल का आधुनिक इतिहास

 

सिख साम्राज्य

रणजीत सिंह और संसार चंद – 

 संसारचंद के कहलूर पर आक्रमण के पश्चात कहलूर के राजा महानचन्द गोरखा कमांडर अमर सिंह थापा को 1804 में सहायता के लिए बुलाया।  अमर सिंह थापा ने 1806 को महलमोरियों को हराया।  संसार चंद ने रणजीत सिंह की सहायता मांगी।  संसार चंद और महाराजा रणजीत सिंह ने 1809  में ज्वालामुखी की संधि हुई जिसके अनुसार गोरखों को हराने के बदले संसार चंद महाराजा रणजीत सिंह को काँगड़ा किला और 66 गाँव देगा।  रणजीत सिंह अमर सिंह थापा को हराया महाराजा रणजीत सिंह ने मजीठिया को काँगड़ा किले का पहला सिख किलेदार तथा पहाड़ी रियासतों का गवर्नर बनाया।  ज्वालाजी  में  सोने का छत्र  भी चढ़ाया।

 

रणजीत सिंह और अनिरुद्ध – 

संसारचंद की  मृत्यु के बाद अनिरुद्ध चंद गद्दी पर बैठा। रणजीत सिंह ने अपने दीवान ध्यानसिंह के पुत्र के लिए अनिरुद्ध की बहन का हाथ माँगा परन्तु वः ताल मटोल करने लगा।  बाद में अनिरुद्ध ने अपनी माँ बहनों के साथ अंग्रेजी राज्य में शरण ली। 

 

रणजीत सिंह और अन्य पहाड़ी राज्य – 

1813  में रणजीत सिंह ने हरिपुर का राज्य छीन लिया।  उसके राजा भूप सिंह को लाहौर में बंदी बना लिया।  1815  में जसवं रियासत में कब्ज़ा कर लिया नूरपुर में भी रणजीत सिंह का कब्ज़ा हो गया।  सिब्बा राज्य में भी 1809 में रणजीत सिंह के कब्जे में आ गया।

 

जनरल वेंचुरा –

सिख सेना के जनरल वेंचुरा के नेतृत्व में 1840 में सेना कुल्लू और मंडी की और बड़ी कुल्लू के राजा ने आत्मसमर्पण कर दिया मंडी के राजा बलवीर सेन को कैद कर लिया परन्तु 1841 में छोड़ दिया गया।  जिसके पश्चात उसने अपने 12  किलों  को सिखों से मुक्त कर दिया गया।  बिलासपुर , नालागढ़ , सिरमौर , शिमला की रियासतें ब्रिटिश संरक्षण की वजह से सिखों से बची रही।

 

गोरखा आक्रमण – नेपाल नरेश रणबहादुर शाह ने हर्षदेव जोशी के बुलाने पर अपनी सेना भेजी जिसका नेतृत्व अमर सिँह थापा ने किया 1804 में गढ़वाल पर भी  कब्जा किया।  गोरखों ने सबसे पहले हिमाचल के सिरमौर राज्य पर कब्जा किया।  सिरमौर के कब्जे के बाद गोरखों ने अजीमगढ़ टिंडूर की सेना को हराया।  अमर सिंह थापा ने हिन्दुर पुंडर जुब्बल  थापा को अपने अधीन कर लिया। 

गोरखा ब्रिटिश युद्ध –


1 नवंबर 1814 में अंग्रेजों ने गोरखों के विरुद्ध  युद्ध छोड़ दिया।  जिसमे पहाड़ी राजाओं ने ब्रिटिशों के साथ दिया।  अंग्रेजों की चार टुकड़ियाँ बनी।  गिलेस्पी, मार्टिनडेल , विलियम , फ्रेजर और ोटरलोनी ने इन टुकड़ियों का नेतृत्व किया। 


सोगुली  संधि – 

गोरखा ब्रिटिश युद्ध की समाप्ति हुई।  गोरखों ने वापिस नेपाल जाना स्वीकार किया।  सिक्किम राज्य के समस्त अधिकारों को वापिस ले लिया।  अंग्रेजों को गढ़वाल ,कुमाऊं ,शिमला ,पहाड़ी रियासत एवं तराई के अधिकांश भाग प्राप्त हुए।


1857 का विद्रोह:-

भारत का पहला स्वतन्त्रता संग्राम ब्रिटिशों के विरुद्ध अनेक राजनितिक, सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और सैनिकों के रोष के होने से हुआ I पहाड़ी राज्यों के लोग भारत के अन्य भागों के लोगों की तरह सक्रिय नहीं थे I बुशहर के आलावा लगभग सभी लोग और उनके शासक क्रांति के समय निष्क्रिय रहे I उनमे से कुछ ने तो क्रांति के समय ब्रिटिशों का साथ भी दिया I इनमें चंबा, बिलासपुर, बग़ल, और धामी के शासक शामिल थे I बुशहर ने ब्रिटिशों के हितों के विरुद्ध प्रतिक्रिया दी हालाँकि यह स्पष्ट नही है की इन्होने क्रन्तिकरितों की सच में सहायता की या नहीं I     

 

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