सोलन

जिले के रूप में गठन 1 सितम्बर, 1972 ई० में और जिला मुख्याल   सोलन  है |  सोलन का कुल क्षेत्रफल 1,936 वर्ग किलोमीटर है | सोलन जिला हिमाचल  प्रदेश के दक्षिण पश्चिन भाग में स्थित है | सोलन जिले के पूर्व में शिमला, पश्चिम में पंजाब, उत्तर में बिलासपुर और मंडी तथा दक्षिण में सिरमौर और हरयाणा की सीमाएं लगती है |

इतिहास 

सोलन जिला शिमला पहाड़ी की रियासतों का हिस्सा है |

बघाट रियासत– सोलन शहर और  कसौली बघाट रियासत का हिस्सा थे | बघात रियासत की स्थापना धरना गिरी (दक्षिण भारत) से आये पवार राजपूत ‘बसंत पाल’ (हरिचंद पाल) ने की थी | राणा इंद्रपाल ने रियासत का नाम बघात रखा | बघात रियासत बिलासपुर से 1790 ई० में स्वतंत्र हुई  | राणा महेंद्र सिंह बघात रियासत का पहला स्वतंत्र शासक था | राणा महेंद्रसिंह की 1839 ई० में बिना किसी संतान की मृत्यु हो गई जिसके बाद रियासत ब्रिटिश सरकार के नियंत्रण में आ गई | राणा महेंद्र सिंह के बाद राणा विजय सिंह बघाट का शासक बना | 1849 ई० में विजय सिंह की मृत्यु के बाद (बिना किसी पुत्र के) बघाट रियासत लार्ड डलहौजी की लेप्स की निति के तहत अंग्रेजों के अधीन आ गई | राणा उम्मेद सिंह को 1862 ई० में गद्दी प्राप्त हुई जब वह मृत्यु शैय्या पर थे | उम्मेद सिंह के बाद राणा दलीप सिंह (1862-1911 ई०) गद्दी पर बैठे | उन्होंने बघाट रियासत की राजधानी बोछ से सोलन बदली | राणा दलीप सिंह की  मृत्यु के बाद राणा दुर्गा सिंह (1911-1948ई०) बघाट रियासत के अंतिम शासक थे | सोलन (बघात) के दरबार हाल में 26 जनवरी, 1948 ई० को ‘ हिमाचल प्रदेश’ का नामकरण किया गया जिसकी अध्यक्षता राजा दुर्गा सिंह ने की |

बाघल रियासत (अर्की) बाघल रियासत की स्थापना उज्जैन के पवार राजपूत अजयदेव ने की | बाघल रियासत गंभर नदी के आसपास स्थित था | बाघल रियासत की राजधानी सैरी, ढूंडन, डुगली और डारला रही | राणा सभाचन्द  ने 1643 ई० में अर्की को बाघल रियासत की राजधानी बनाया | इन्हें बाघल रियासत का पहला शासक माना जाता है | राणा जगत सिंह (1728-1828  ई०) के शासनकाल में गोरखा आक्रमण  हुआ | बाघल रियासत 1803  ई० से 1815 ई० तक गोरखों के नियंत्रण में रही | राजा जगत सिंह ने 7 वर्षों तक नालागढ़ रियासत में शरण ली | ब्रिटिश सरकार  ने 1815 ई० में बाघल रियासत से गोरखों का नियंत्रण हटाया | बाघल रियासत के अंतिम राजा रजेन्द्र सिंह थे |

 कुनिहार रियासत – कुनिहार रियासत की स्थापना जम्मू (अखनूर) से आए अमोज देव ने 1154  ई० में की | कुनिहार रियासत की राजधानी हाटकोटी थी | गोरखा युद्ध के समय मगन देव रियासत के शासक थे |

मांगल रियासत – मांगल रियासत की स्थापना मारवाड़ (राजिस्थान से आये) अत्रि राजपूत ने की थी | मांगल बिलासपुर रियासत की जांगिर थी | मांगल रियासत का नाम मंगल सिंह के नाम पर पड़ा | 1815 ई०में गोरखा नियंत्रण से मुक्ति के बाद ब्रिटिश सरकार  ने ‘राणा बहादुर सिंह’ को स्वतंत्र सदन प्रदान की | राणा  मांगल रियासत के अंतिम राजा थे|

हण्डूर रियासत (नालागढ़) – हण्डूर रियासत की स्थापना 1100  ई० के आसपास अजयचन्द ने की थी जो कहलूर के राजा कहालचन्द का बडा बेटा था | हण्डूर रियासत कहलूर रियासत की प्रशाखा थी | 1398  ई० में तैमूर लंग ने भारत पर आक्रमण किया | उस समय हण्डूर रियासत का राजा आलमचंद था | आलमचंद ने तैमूर लंग की मदद की थी | जिसके बदले तैमूर लंग ने उसके राज्य को हानि नहीं बनाया | विक्रमचन्द (1421-1435  ई०) ने नालागढ़ शहर की स्थापना की | विक्रमचन्द ने नालागढ़ को हण्डूर रियासत की राजधानी बनाया | रामचंद (1522-68  ई०) ने ‘रामगढ़’ का किला बनाया | रामचंद ने रामशहर को अपनी ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाया | राजा अजमेर चंद ( 1712-41  ई०) ने अजमेर ग्रह का किला बनवाया | राजा रामशरण (17881848  ई०) ने संसारचंद का साथ दिया था | उन्होंने 1790  ई० में कहलूर रियासत को हराकर फतेहपुर, रतनपुर और बहादुरपुर किले छीन लिए थे | गोरखा आक्रमण के समय राजा रामशरण को 3 वर्षों तक राम शहर किले में छिपना पड़ा | 1804  ई० में गोरखों ने रामशहर पर कब्जा कर लिया | राजा रामशरण संसारचंद का घनिष्ट मित्र था | राजा रामशरण ने प्लासी के किले (होशियारपुर) में 10 वर्षों तक शरण ली | राजा रामशरण के समय हण्डूर में पहाड़ी (काँगड़ा) चित्रकला का विकार हुआ | राजा रामशरण की 1848  ई० में मृत्यु हो गई | राजा रामशरन के बाद राजा बिजे सिंह (1848-1857 ई०) राजा बने | नालागढ़ को 1966  ई० में हिमाचल प्रदेश में मिलाया गया जो 1972  ई० में सोलन जिले का हिस्सा बना |

बेजा रियासत बेजा रियासत की स्थापना दिल्ली के तैवर राजा धोलचन्द ने की जबकि दूसरी जनश्रुति के अनुसार बेजा रियासत की स्थापना धोलचन्द के 43 वें वंशज गर्वचंद ने की | बेजा रियासत बिलासपुर (कहलूर) के अधीन था | 1790  ई० में हण्डूर द्वारा कहलूर को हटाने के बाद बेजा रियासत स्वतंत्र हो गई |गोरखा आक्रमण के समय मानचंद बेजा रियासत के मुखिया थे | 1815  ई० में बेजा से गोरखा नियंत्रण हटने के बाद ठाकुर मानचंद को शासक सौंपा गया | उन्हें अंग्रेजों ने ‘ठाकुर’ का ख़िताब दिया |

कुठाड़ रियासत – कुठाड़ रियासत की स्थापना किश्तवार (कश्मीर) से आये सुरतचंद ने की थी | 1815  ई० से पूर्व कुठाड़ हण्डूर और बिलासपुर की जागीर थी |

महलोग रियासत – महलोग रियासत की स्थापना अयोध्या से आये वीरचंद ने की थी | वीरचंद शुरू में पट्टा गांव में रहने लगे और उसे अपनी राजधानी बनाया | उत्तम चंद ने सिरमौर के राजा से हरने के बाद महलोग रियासत की राजधानी 1612  ई० में ‘कोट धारसी’ से स्थानांतरित की | महलोग क्योंथल रियासत की जागीर थी |सोलन

जिले के रूप में गठन 1 सितम्बर, 1972 ई० में और जिला मुख्याल   सोलन  है | सोलन का कुल क्षेत्रफल 1,936 वर्ग किलोमीटर है | सोलन जिला हिमाचल  प्रदेश के दक्षिण पश्चिन भाग में स्थित है | सोलन जिले के पूर्व में शिमला, पश्चिम में पंजाब, उत्तर में बिलासपुर और मंडी तथा दक्षिण में सिरमौर और हरयाणा की सीमाएं लगती है |

इतिहास 

सोलन जिला शिमला पहाड़ी की रियासतों का हिस्सा है |

बघाट रियासत– सोलन शहर और  कसौली बघाट रियासत का हिस्सा थे | बघात रियासत की स्थापना धरना गिरी (दक्षिण भारत) से आये पवार राजपूत ‘बसंत पाल’ (हरिचंद पाल) ने की थी | राणा इंद्रपाल ने रियासत का नाम बघात रखा | बघात रियासत बिलासपुर से 1790 ई० में स्वतंत्र हुई  | राणा महेंद्र सिंह बघात रियासत का पहला स्वतंत्र शासक था | राणा महेंद्रसिंह की 1839 ई० में बिना किसी संतान की मृत्यु हो गई जिसके बाद रियासत ब्रिटिश सरकार के नियंत्रण में आ गई | राणा महेंद्र सिंह के बाद राणा विजय सिंह बघाट का शासक बना | 1849 ई० में विजय सिंह की मृत्यु के बाद (बिना किसी पुत्र के) बघाट रियासत लार्ड डलहौजी की लेप्स की निति के तहत अंग्रेजों के अधीन आ गई | राणा उम्मेद सिंह को 1862 ई० में गद्दी प्राप्त हुई जब वह मृत्यु शैय्या पर थे | उम्मेद सिंह के बाद राणा दलीप सिंह (1862-1911 ई०) गद्दी पर बैठे | उन्होंने बघाट रियासत की राजधानी बोछ से सोलन बदली | राणा दलीप सिंह की  मृत्यु के बाद राणा दुर्गा सिंह (1911-1948ई०) बघाट रियासत के अंतिम शासक थे | सोलन (बघात) के दरबार हाल में 26 जनवरी, 1948 ई० को ‘ हिमाचल प्रदेश’ का नामकरण किया गया जिसकी अध्यक्षता राजा दुर्गा सिंह ने की |

बाघल रियासत (अर्की) बाघल रियासत की स्थापना उज्जैन के पवार राजपूत अजयदेव ने की | बाघल रियासत गंभर नदी के आसपास स्थित था | बाघल रियासत की राजधानी सैरी, ढूंडन, डुगली और डारला रही | राणा सभाचन्द  ने 1643 ई० में अर्की को बाघल रियासत की राजधानी बनाया | इन्हें बाघल रियासत का पहला शासक माना जाता है | राणा जगत सिंह (1728-1828  ई०) के शासनकाल में गोरखा आक्रमण  हुआ | बाघल रियासत 1803  ई० से 1815 ई० तक गोरखों के नियंत्रण में रही | राजा जगत सिंह ने 7 वर्षों तक नालागढ़ रियासत में शरण ली | ब्रिटिश सरकार  ने 1815 ई० में बाघल रियासत से गोरखों का नियंत्रण हटाया | बाघल रियासत के अंतिम राजा रजेन्द्र सिंह थे |

 कुनिहार रियासत – कुनिहार रियासत की स्थापना जम्मू (अखनूर) से आए अमोज देव ने 1154  ई० में की | कुनिहार रियासत की राजधानी हाटकोटी थी | गोरखा युद्ध के समय मगन देव रियासत के शासक थे |

मांगल रियासत – मांगल रियासत की स्थापना मारवाड़ (राजिस्थान से आये) अत्रि राजपूत ने की थी | मांगल बिलासपुर रियासत की जांगिर थी | मांगल रियासत का नाम मंगल सिंह के नाम पर पड़ा | 1815 ई०में गोरखा नियंत्रण से मुक्ति के बाद ब्रिटिश सरकार  ने ‘राणा बहादुर सिंह’ को स्वतंत्र सदन प्रदान की | राणा  मांगल रियासत के अंतिम राजा थे|

हण्डूर रियासत (नालागढ़) – हण्डूर रियासत की स्थापना 1100  ई० के आसपास अजयचन्द ने की थी जो कहलूर के राजा कहालचन्द का बडा बेटा था | हण्डूर रियासत कहलूर रियासत की प्रशाखा थी | 1398  ई० में तैमूर लंग ने भारत पर आक्रमण किया | उस समय हण्डूर रियासत का राजा आलमचंद था | आलमचंद ने तैमूर लंग की मदद की थी | जिसके बदले तैमूर लंग ने उसके राज्य को हानि नहीं बनाया | विक्रमचन्द (1421-1435  ई०) ने नालागढ़ शहर की स्थापना की | विक्रमचन्द ने नालागढ़ को हण्डूर रियासत की राजधानी बनाया | रामचंद (1522-68  ई०) ने ‘रामगढ़’ का किला बनाया | रामचंद ने रामशहर को अपनी ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाया | राजा अजमेर चंद ( 1712-41  ई०) ने अजमेर ग्रह का किला बनवाया | राजा रामशरण (17881848  ई०) ने संसारचंद का साथ दिया था | उन्होंने 1790  ई० में कहलूर रियासत को हराकर फतेहपुर, रतनपुर और बहादुरपुर किले छीन लिए थे | गोरखा आक्रमण के समय राजा रामशरण को 3 वर्षों तक राम शहर किले में छिपना पड़ा | 1804  ई० में गोरखों ने रामशहर पर कब्जा कर लिया | राजा रामशरण संसारचंद का घनिष्ट मित्र था | राजा रामशरण ने प्लासी के किले (होशियारपुर) में 10 वर्षों तक शरण ली | राजा रामशरण के समय हण्डूर में पहाड़ी (काँगड़ा) चित्रकला का विकार हुआ | राजा रामशरण की 1848  ई० में मृत्यु हो गई | राजा रामशरन के बाद राजा बिजे सिंह (1848-1857 ई०) राजा बने | नालागढ़ को 1966  ई० में हिमाचल प्रदेश में मिलाया गया जो 1972  ई० में सोलन जिले का हिस्सा बना |

बेजा रियासत बेजा रियासत की स्थापना दिल्ली के तैवर राजा धोलचन्द ने की जबकि दूसरी जनश्रुति के अनुसार बेजा रियासत की स्थापना धोलचन्द के 43 वें वंशज गर्वचंद ने की | बेजा रियासत बिलासपुर (कहलूर) के अधीन था | 1790  ई० में हण्डूर द्वारा कहलूर को हटाने के बाद बेजा रियासत स्वतंत्र हो गई |गोरखा आक्रमण के समय मानचंद बेजा रियासत के मुखिया थे | 1815  ई० में बेजा से गोरखा नियंत्रण हटने के बाद ठाकुर मानचंद को शासक सौंपा गया | उन्हें अंग्रेजों ने ‘ठाकुर’ का ख़िताब दिया |

कुठाड़ रियासत – कुठाड़ रियासत की स्थापना किश्तवार (कश्मीर) से आये सुरतचंद ने की थी | 1815  ई० से पूर्व कुठाड़ हण्डूर और बिलासपुर की जागीर थी |

महलोग रियासत – महलोग रियासत की स्थापना अयोध्या से आये वीरचंद ने की थी | वीरचंद शुरू में पट्टा गांव में रहने लगे और उसे अपनी राजधानी बनाया | उत्तम चंद ने सिरमौर के राजा से हरने के बाद महलोग रियासत की राजधानी 1612  ई० में ‘कोट धारसी’ से स्थानांतरित की | महलोग क्योंथल रियासत की जागीर थी |

Solan District Geography

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