घाटियां:-

 काँगड़ा  घाटी :- काँगड़ा  घाटी को  वीरघाटी  के नाम से भी जाना जाता ह। यह शाहपुर से पालमपुर तक फैली है। घाटी का बीड स्थान हैंग-ग्लाइडिंग के लिए प्रसिद्ध है।

सांगला (बसपा):- सांगला (बसपा) घाटी समुद्रतल  से 1830 मीटर  से 3475 मीटर तक ऊंचाई के मध्य  स्थित  है। सांगला  घाटी का सबसे   ऊँचा  गांब छितकुल है

बल्ह  घाटी :-यह  मंडी  जिले के मैदानी भागो में  स्थित  है । बल्ह  घाटी  हिमाचल प्रदेश की सबसे उपजाऊ घाटी है। इसे  सुंदरनगर  घाटी भी कहते है।

चम्बा  घाटी :- चम्बा  घाटी   को रावी घाटी के नाम  से भी जाना  जाता  है। इस घाटी में  मुख्यते  गद्दी  जनजाति के लोग  ही रहते  है।

कुल्लू  घाटी  :- कुल्लू घाटी  को देवघाटी  के नाम  से भी जाना जाता है। इस  घाटी में   देवदार  और   सेब के  बृक्ष  पाए  जाते  है । कुल्लू में    रूपी  घाटी चांदी   की खानो    के  लिए  प्रसिद्ध   है  ।

पोंटा  घाटी   :–यह  घाटी  कियारड़ा-दून-घाटी    के नाम से भी जानी  जाती है। गिरी   और  बांटा  इस  घाटी  की प्रमुख  नदिया   है।

लाहौलस्पिति  : -यह   घाटी हिमाचल  प्रदेश  के उच्तम  क्षेत्र  में  स्थित  है । इस घाटी में अल्पाइन   ऋक्ष   पाए  जाते  है। यहां  मुख्यता  आलू  की खेती की  जाती  है। चंद्र और भगा इस घाटी की प्रमुख  नदिया है । लाहौल की  भागा घाटी  को  रंगोली  घाटी  भी  कहा जाता है।

पब्बर   घाटी :-इस घाटी  को  रोहड़ू घाटी भी कहा जाता है। पब्बर इस घाटी की प्रमुख  नदी है ,जिसका उद्गम स्थल चांसल चोटी है

सतलुज घाटी :- यह घाटी किनौर के शिपकी से बिलासपुर जिले तक फैली है

सरसा घाटी :- सोलन जिले में स्थित घाटी को औद्योगिक घाटी भी कहा जाता है।

चौंतरा घाटी :- यह घाटी मंडी जिले की जोगिन्दरनगर में स्थित है।

जसवां:–दून-घाटी ऊना  जिले में स्थित है। इस घाटी को स्वां घाटी भी कहा जाता है।

अश्वनी घाटी :—इस घाटी के बाएं ओर क्यूँथल ओर दाएं ओर बघाटी  बोली बोली  जाती है

कुनिहार घाटी :—  यह घाटी सोलन जिले में स्थित है।

चुराहघाटी :–चम्बा जिले में बैरा ओर स्यूल नदियां इस घाटी का निर्माण करते है

गारा घाटी :—गारा घाटी को चन्द्रा घाटी भी कहते है। यह लाहौल में स्थित है।

चौहार घाटी :—–मंडी जिले के उत्तर में पूर्व में स्थित उहल नदी द्वारा चौहार घाटी का निर्माण किया गया है। 

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